Indore Infertility

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की जरूरत कब होती है, यह प्रक्रिया कैसे की जाती है, IUI और IVF में क्या अंतर है और IVF उपचार के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Dr. Gajendra TomarDr. Gajendra Tomar7 May 20204 min read
आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की ज़रूरत कब होती है?

निम्न समस्याओं के कारण आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की ज़रूरत हो सकती है:

फॉलोपियन ट्यूब्स बंद होना

बंद ट्यूब के कारण अंडाशय में से निकलने वाले अण्डों का निषेचन संभव नहीं होता है, इसलिए IVF या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया द्वारा ये प्रक्रिया शरीर के बाहर IVF लैब में की जाती है।

सारी जांचें सामान्य होने पर भी गर्भधारण न कर पाना

कई बार महिला एवं पुरुष की सारी जांचें सामान्य होने के बावजूद प्रेगनेंसी नहीं हो पाती। ऐसे में महिला की बढ़ती उम्र को ध्यान में रखते हुए जरूरी है कि कृत्रिम गर्भाधान के बारे में सोचा जाए। कृत्रिम गर्भाधान के दो तरीके होते हैं, IUI एवं IVF।

पुरुषों में शुक्राणुओं की मात्रा में कमी या शुक्राणु न होना

शुक्राणु की जाँच की रिपोर्ट में जब पुरुषों में शुक्राणु की कमी या शुक्राणु की मोटिलिटी की कमी की रिपोर्ट आए तब IVF करवाना आवश्यक हो सकता है।

अंडे बनने में अनियमितता (PCOD) या अंडे न बनना

PCOD यानी महिलाओं में अंडे बनने की समस्या हो तो IVF से सफलता मिल सकती है।

महिलाओं की बढ़ती उम्र या रजोनिवृत्ति के पश्चात गर्भधारण

35 की उम्र के बाद महिलाओं का नेचुरल रूप से गर्भधारण करने की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए जरूरी है कि ज्यादा समय न बर्बाद करते हुए मरीज एक IVF स्पेशलिस्ट की राय ले एवं IVF ट्रीटमेंट के बारे में सोचे।

बार बार IUI / IVF में असफलता

जब मरीज एक से अधिक बार IVF यानी टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया में असफल रहा हो तब प्राकृतिक रूप से माँ बनने की संभावना बहुत कम हो जाती है और मरीज के पास दोबारा IVF करवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। ऐसे में किसी अनुभवी IVF स्पेशलिस्ट की सलाह लेना आवश्यक है।

टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ प्रक्रिया कैसे की जाती है

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के दौरान

  • अंडाशय को दवाइयों एवं इंजेक्शंस द्वारा उत्तेजित किया जाता है ताकि अधिक मात्रा में अंडे मिल सकें।
  • सोनोग्राफी द्वारा अण्डों की परिपक्वता की नियमित जाँच की जाती है।
  • उचित समय आने पर इंजेक्शन द्वारा अंडों के फूटने का संकेत दिया जाता है।
  • अंडे फूटने के इंजेक्शन के 34 से 36 घंटों के पश्चात ओवम पिकअप प्रक्रिया द्वारा अण्डों को शरीर से निकाला जाता है।
  • अण्डों का निषेचन पति द्वारा दिए गए शुक्राणुओं के साथ आईवीएफ लैब में किया जाता है।
  • निषेचित अण्डों को इन्क्यूबेटर्स में रखा जाता है।
  • 3 से 5 दिन पश्चात भ्रूणों को महिला के गर्भाशय में प्रस्थापित किया जाता है एवं अतिरिक्त भ्रूणों को क्रायोप्रिजर्वेशन प्रक्रिया द्वारा संगृहीत किया जाता है।
  • एम्ब्र्यो ट्रांसफर के 13 से 14 दिन पश्चात खून की जाँच द्वारा प्रेगनेंसी का पता लगाया जाता है।

IUI प्रक्रिया कब करवानी चाहिए या IVF?

IUI प्रक्रिया तभी की जाती है जब महिलाओं की ट्यूब खुली हो एवं पुरुष में शुक्राणु की संख्या एवं गतिशीलता ठीक हो। साथ ही महिला की उम्र 32 वर्ष से कम हो।

यदि महिला की ट्यूब बंद हो या पुरुष की शुक्राणु की रिपोर्ट नॉर्मल न हो तो ऐसे में IVF द्वारा ही प्रेगनेंसी हो सकती है।

Source article के अनुसार, एक IUI साइकिल का खर्च तकरीबन 8000 से 10000 रुपये और उसकी सफलता दर 10% से 15% बताई गई है, जबकि एक IVF साइकिल की सफलता दर तकरीबन 60% से 65% और IVF का खर्च 1 लाख से 1.5 लाख रुपये बताया गया है। ये आंकड़े source article में दिए गए हैं और इन्हें वर्तमान clinical या pricing information नहीं माना जाना चाहिए।

क्या IVF करवाने पर पूरी तरह बेड रेस्ट करना ज़रूरी है?

Source article के अनुसार, IVF के बाद महिला अपनी सामान्य घरेलू एवं ऑफिस के काम-काज कर सकती है और डॉक्टर की तरफ से इस बात की कोई परहेज नहीं होती है। Article में यह भी बताया गया है कि कई studies ने IVF के बाद सक्रिय रहने से बेहतर परिणामों का समर्थन किया है।

IVF करवाने के लिए कितनी बार क्लिनिक पर आना पड़ता है?

यदि आप इंदौर से बाहर रहते हैं और इंदौर में IVF करवाना चाहते हैं तो source article के अनुसार IVF के इलाज के दौरान कम से कम तीन बार इंदौर आना पड़ सकता है।

  • पहली बार मरीज को 3 से 4 घंटे का समय निकालकर अपनी जाँच के लिए इंदौर आना होता है। इसके पश्चात IVF इंजेक्शन अपने साथ पैक करवाकर उसी दिन वापस लौट सकते हैं।
  • दूसरी बार मरीज को 3 से 4 दिनों के लिए इंदौर आना होगा, जिस दौरान IVF की प्रक्रिया की जाएगी।
  • तीसरी बार एक दिन के लिए इंदौर आना होगा जब IVF की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

क्या IVF की प्रक्रिया में बहुत दर्द होता है?

Source article के अनुसार IVF के दौरान लगने वाले इंजेक्शन में मामूली दर्द होता है। अक्सर मरीज को बर्फ की सिकाई करने पर आराम मिलता है।

IVF की प्रक्रिया में अंडाशय से अंडे निकालने की प्रक्रिया निश्चेतना की अवस्था में की जाती है, इसलिए उस समय दर्द महसूस नहीं होता।

IVF में कितने इंजेक्शन लगते हैं?

Source article के अनुसार पूरी IVF की एक साइकिल में 15 से 20 इंजेक्शन लगते हैं। ये इंजेक्शन रोज एक ही समय लगाए जाते हैं।

इंजेक्शन के बारे में अधिक जानकारी हेतु संबंधित वीडियो देखने की सलाह source article में दी गई है।

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Dr. Gajendra Tomar

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Dr. Gajendra Tomar

Fertility Specialist & Unit Head

Dr. Gajendra Singh Tomar (MD, MRCOG) is the Unit Head and a fertility specialist at Indore Infertility Clinic, with over two decades of experience in obstetrics, gynaecology and reproductive medicine. He founded the clinic and has performed more than 2,500 ovum pick-ups and 3,500 embryo transfers.

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