इंदौर में टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की ज़रूरत कब होती है?

निम्न समस्याओं के कारण आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया की ज़रूरत हो सकती है:

  •  फॉलोपियन ट्यूब्स बंद होना।
  • सारी जांचें सामान्य होने पर भी गर्भधारण न कर पाना ।
  • पुरुषों में शुक्राणुओं की मात्रा में कमी या शुक्राणु न होना ।
  • अंडे बनने में अनियमितता ( PCOD ) या अंडे न बनना ।
  • महिलाओं की बढ़ती उम्र या रजोनिवृत्ति के पाश्चात गर्भधारण ।
  • बार बार IUI /IVF में असफलता ।

टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ प्रक्रिया कैसे की जाती है

इंदौर में टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया का खर्च

आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के दौरान:

  • अंडाशय को दवाइयों एवं इंजेक्शंस द्वारा उत्तेजित किया जाता है ताकि अधिक मात्रा में अंडे मिल सके।
  • साथ ही सोनोग्राफी द्वारा अण्डों की परिपक्वता की नियमित जाँच की जाती है ।
  • उचित समय आने पर, इंजेक्शन द्वारा अंडो की फूटने का संकेत दिया जाता है।
  • अंडे फूटने के इंजेक्शन के ३४ से ३६ घंटों के पश्चात ओवम पिकअप प्रक्रिया द्वारा अण्डों को शरीर में से निकल लिया जाता है ।
  • अण्डों का निषेचन पति द्वारा दिए गए शुक्राणुओं के साथ आईवीएफ लैब में किया जाता है।
  • निषेचित अण्डों को इन्क्यूबेटर्स में रखा जाता है।
  • ३ से ५ दिन पश्चात भ्रूणों को महिला के गर्भाशय में प्रस्थापित किया जाता है, एवं अतिरिक्त भ्रूणों को कर्योपरेसेर्वेशन प्रक्रिया द्वारा संगृहीत किया जाता है।
  • एम्ब्र्यो ट्रांसफर – भ्रूण प्रस्थापन के प्रक्रिया के १३ से १४ दिन पश्चात खून की जाँच द्वारा प्रेगनेंसी का पता लगाया जाता है ।
अधिक जानकारी